15486जब भी हमारे हिन्दू पर्व आते हैं अक्सर मत मतांतर हो सकते हैं परंतु यह धर्म बहुत ही विशाल है और सदा तर्क तथा वैज्ञानिक आधार पर टिका है। देश काल तथा पात्र अनुसार समय समय पर इसमें परिवर्तन किए जाते रहे हैं। काफी विद्वानों की शास्त्रानुसार मान्यता रही है कि जब शुक्र अस्त हो तो नव विवाहितों को करवा चौथ पर उद्यापन नहीं करना चाहिए। इस बार भी ऐसी ही असमंजस की स्थिति है परंपरानुसार करवा चौथ का उद्यापन पुत्री के अभिभावक मायके में ही करवाते हैं जो एक साल छोड़कर अर्थात पहले, तीसरे पांचवें सातवें साल में करवाया जाता है।

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य व वास्तुविद्, चंडीगढ़ 098156-19620,

  

शुक्र ग्रह जो वैवाहिक कार्यों के लिए शुभ माने गए हैं वे 16 अक्तूबर से 1 नवंबर तक अस्त रहेंगे। इसी लिए तारा डूबने के कारण इस वर्ष  इस दौरान अक्तूबर नवंबर में विवाह के मुहूर्त नहीं हैं।

परंतु शुक्रास्त के कारण शेष सभी पर्व या व्रत जिनका संबंध विवाह के बाद होने वाले कार्यक्लापों जैसे करवा चौथ का व्रत, इससे संबंधित दान, उपहार देने या उद्यापन या संतान्नोपत्ति आदि से है, किए जाएं,  यह तर्क सम्मत नहीं हैं। शुक्र अस्त होने पर केवल विवाह के पाणिग्रहण संस्कार को वर्जित कहा गया है ताकि वैवाहिक जीवन में शुभता बनी रहे परंतु विवाह के बाद के समस्त कार्यों को इस अवधि में वर्जित करना कहां तक सकारात्मकतर्कसंगत या क्रियात्मक है? इसमें मत मतांतर हो सकता है परंतु हमारा मत यही है कि विवाहेत्तर धार्मिक अनुष्ठानों में शुक्रास्त का विचार नहीं करना चाहिए अतः करवा चौथ पर अपने विवेक से व्रत रखें, उद्यापन करें और सभी परंपराओं को निभाने में कोई अशुभ तो नहीं है।

एक प्रशन

गत कई वर्षों में जब गुरु और शुक्र अस्त हुए हैं, सभी मांगलिक कार्य हुए हैं।

19 अक्तूबर को दशहरा मनाया गया, 31 अक्तूबर को महिलाएं अहोई अष्टमी पर सन्तान और पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी। क्या वह मांगलिक कार्य सुहाग से संबंधित नहीं होगा। गत वर्ष हमने दीवाली मनाई और शुक्र अस्त था। शुक्र का संबंध विवाह के शुभ समय से है कि गृहस्थी के कार्यक्लापों से है। क्या शुक्रास्त पर सन्तानोपत्ति  की जाए \या गर्भस्थ शिशु  पर भी कोई प्रभाव पड़ेगा। 

करवा चौथ

कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चौथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन केवलचंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिवपार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाओं   और कुंवारी  कन्याओं  के लिए गौरी पूजन का भी विशेशमहात्म्य है।आधंुनिक युग में चांद से जुड़ा यह पौराणिक  पर्व  महिला दिवस से कम नहीं है जिसे पति मंगेतर अपनी अपनी आस्थानुसार मनाते हैं।

करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। विवाहित महिलाएँ भगवान शिव माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शनतक किया जाता है।

करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है।

  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त. 17.36 से 18.54
  • चंद्रोदय. 20.00
  • चतुर्थी तिथि आरंभ. 18.37 ;27 अक्तूबर
  • चतुर्थी तिथि समाप्त. 16.54 ;28 अक्तूबर

कैसे करें पारंपरिक व्रत?

प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके पतिपुत्रपौत्रपत्नी तथा सुख सौभाग्य की कामना की इच्छा का संकल्प लेकर निर्जल व्रत रखें। शिवपार्वती, गणेश कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र का पूजन करें। बाजार में मिलने वाला करवा चौथ का चित्र या कैलेंडर पूजा स्थान पर लगा लें। चंद्रोदय पर अर्घ्य दें। पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में चावलउड़द की दाल भरें सुहाग की सामग्रीकंघीसिंदूरचूड़ियांरिबन, रुपये आदि रखकर दान करें। सास के चरण छूकर आर्शीवाद लें और फल, फूल, मेवा, बायन, मिश्ठानबायनासुहागसामग्री, 14पूरियांखीर आदि उन्हें भेंट करें। विवाह के प्रथम वर्श तो यह परंपरा सास के लिए अवश्य निभाई जाती है। इससे सासबहू के रिश्ते और मजबूत होते हैं।

क्या है सरगी का वैज्ञानिक आधार ?

व्रत रखने वाली महिलाओं को उनकी सास सूर्योदय से पूर्व सरगीसदा सुहागन रहोके आशीर्वाद सहित खाने के लिए देती हैं जिसमें फल, मिठाई, मेवे, मटिठ्यांसेवियां, आलू सेबनी कोई सामग्री, पूरी आदि होती है। यह खाद्य सामग्री शरीर को पूरा दिन निर्जल रहने और शारीरिक आवश्यकता को पर्याप्त उर्जा प्रदान करने में सक्षम होती है। फल में छिपाविटामिन युक्त तरल दिन में प्यास से बचाता है। फीकी मट्ठी उर्जा प्रदान करती है और रक्त्चाप बढ़ने नहीं देती। मेवे आने वाली सर्दी को सहने के लिए शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं। मिठाई सास बहू के संबंधों में मधुरता लाने का जहां प्रतीक है ,वहीं यह व्रत के कारण शुगर का स्तर घटने नहीं देती जिससे शरीर पूरी क्षमता से कार्य करता है और व्रत बिना जल पिए सफल हो जाता है। यह व्रत शारीरिक मानसिक परीक्षा है ताकि वैवाहिक जीवन में विशम विपरीत परिस्थितियों में एक अर्धांगनी, पति का साथ निभा सके। भूखे प्यासे और शांत रहने की कला सीखने का यह भारतीय सभ्यता संस्कृति में पर्वोंं के माध्यम से अनूठा प्रशिक्षण है। चंद्र सौंदर्य एवं मन का कारक ग्रह है अतः चंद्रोदय पर व्रत खोलने से मन में शीतलता का संचार होता है और सोलह श्रृंगार किए पत्नी देख कर कुरुपता में भी सौंदर्य बोध होता है।

चंद्र राशि एवं सामर्थ्य अनुसार क्या दें उपहार और किस रंग की पहनें ड्रैस इस पर्व पर?


  1. मेष: उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें  ड्रैस लाल गोल्डन साड़ी या सूट या लंहगा

2. बृष: उपहार:डायमंड या चांदी का अलंकरण  ड्रैस लाल  सिल्वर साड़ी या सूट।

3.मिथुनः उपहार:विद्युत या इलेक्ट्रानिक उपकरण दें ड्रैस हरी बंधे  साड़ी या सूट, हरीलाल चूड़ियां।

4. कर्कः उपहार:चांदी का गहना दें  ड्रैस लाल सफेद साड़ी या सूट, मल्टी कलर चूड़ियां।

5. सिंहः उपहार:गोल्डन वाच दें  ड्रैस लाल , संतरी, गुलाबी ,गोल्डन साड़ी या सूट।

6. कन्याः उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें  ड्रैस लाल  हरी गोल्डन साड़ी या सूट।

7. तुलाः उपहार:कास्मैटिक्स दें   ड्रैस लाल  सिल्वर गोल्डन साड़ी,लहंगा  या सूट।

8. बृश्चिकः उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें  ड्रैस लालमैरुनगोल्डन साड़ी या सूट।

9. धनुः उपहारपिन्नी या पीला पतीसा ,लडडू दें ड्रैस लाल गोल्डन साड़ी या सूट 9 रंग की चूड़ियां।

10. मकरः उपहार:विवाह की ग्रुप फोटो ग्रे फ्रेम में गीफट करें   ड्रैस इलैक्ट्र्कि ब्लू साड़ी या सूट।

11. कुंभः उपहार:हैंड बैग, ड्राई फ्रूटचाकलेट दें  ड्रैस नेवी ब्लू सिल्वर कलर की मिक्स साड़ी या सूट।

12. मीनः उपहार:राजस्थानी थाली में कोई गोल्ड आयटम और ड्राई फ्रूट्स। ड्रैस लाल गोल्डन साड़ी या सूट।

कुछ कॉमन गीफट

1सोना –  चूड़ी ब्रेसलेट इयरिंग्स टॉप्स भी हो सकते हैं

2. डायमंडखूबसूरत रंगों में रहे हैं।

3. पेंटिंग

4. फोटो कॉलाज –  शादी से लेकर अब तक के फोटो ले सकते हैं

करवा चौथ एक राष्ट्रिय पर्व के तौर पर वेलेंटाईन डे के रुप में मनाया जाना चाहिए।

बदलते परिवेश में पति भी व्रत रखते हैं। आज इस व्रत को सफल खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना की विचार धारा को सम्मुख रख कर किया जा रहा है। अब यह व्रत केवल पत्नी की समर्पण भावना को इंगित करता है, अपितु आपसी संबंधों में सामंजस्य, तारातम्य स्थापित करने तथा आपसी रिश्तों की गर्माहट को बरकरार रखने के लिए किया जा रहा है। यही नहीं, जब बहूसास के चरण स्पर्श करती है और माता स्वरुप सास उसे आशीर्वाद देती है तो आपसी खटास पिघलने लगती है। सास बहू के रिश्ते और स्नेह और मजबूत हो जाते हैं। यही नहीं, दो परिवार जब आपस में उपहारों का आदान प्रदान बायने के रुप में करते है तो कई गलतफहमियां दूर हो जाती हैं, रिश्ते सुरक्षित हो जाते है। कई परिवार दहेज के झूठे केसों से बच जाते हैं। आपसी झगड़े कोर्ट या मीडिया में उछलने से बच जाते हैं। अतः आज के समाज में करवा चौथ एक राष्ट्रीय पर्व के तौर पर वेलेंटाईन डे के रुप में मनाया जाना चाहिए।

आज नए जमाने में कुछ उक्तियां पुरानी पड़ रही हैं। पहले कहा जाता था कि पत्नियांपति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं परंतु आज विशेशतः युवा वर्ग भावी  या वर्तमान पत्नियों केकल्याण एवं सुरक्षित जीवन के लिए करवा चौथ का व्रत रख रहे हैं। इस नए बदलाव से और एकल परिवार के कांस्ेप्ट से युवा पीढ़ी में दांपत्य जीवन की डोर और सुदृढ़ हुई है। वैसे कईप्रौढ़ आज भी मौजूद हैं जो अपने युवा जीवन से पत्नी के प्रति समर्पित थे और आज भी व्रत की परंपरा निभा रहे हैं। करवा चौथ का व्रत अब धार्मिक आस्था का आयोजन ही नहीं अपितुरार्श्ट्ीय स्तर का त्योहार बन गया है जिसमें  होटल, मॉल, सिनेमा, उपहार , ग्रीटिंग कार्ड, मेंहदीसाड़ी, ज्यूलरी, पार्लरकाजमेटिक्स, जैसा कार्पोरेट वर्ग भी इसका हिस्सा बन गया है।

संचार व्यवस्था की सुविधा से पत –पत्नी की दूरियां केवल बहुत कम हो गई हैं। इंटरनेट, वीडियो कांन्फें्रसिंग, वीडियो फोन, मोबाइल आदि ने दूर रहते हुए भी करवा चौथ का व्रत करने और अपने चांद को देखने में विशेष भूमिका निभाई है। पौराणिकता और आधुनिकता का बहुत अनूठा संगम बन गया है करवा चौथ का पर्व जो वास्तविक रुप से वूमैन डे कहलाने लगा है सरकार को इसेभारतीय महिला दिवसया  वेलेंटाइन डे की तर्ज परप्रेम दिवसका रुप देकर अवकाश घोषित करना चहिए।

दांपत्य जीवन में आई दरार को दूर करने या वैवाहिक जीवन को और आनंदमय बनाने के करवा चौथ पर विशेष उपाय

यदि आपके वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानियां हैं यापतिपत्नी के मध्य किसी  वोके आगमन से विस्फोटक स्थिति बन गई है तो इस करवा चौथ के अवसर पर हमारे ये प्रयोगकरने से चूकें। ये उपाय सरलसफल अहिंसक एवं  सात्विक हैं जिससे किसी को शारीरिक नुक्सान नहीं पहुंचेगा और आपके दांपत्य जीवन में मधुरता भी लौट आएगी।

  • जीवन साथी का सान्निध्य पाने के लिए, एक लाल कागज पर अपना जीवन साथी का नाम सुनहरे पैन से लिखें एक लाल रेशमी कपड़े में दो गोमती चक्र, 50 ग्राम पीली सरसोंतथा यह कागज मोड़ कर एक पोटली की तरह बांध लें। इस पोटली को कपड़ों वाली अलमारी में कहीं छिपा कर करवा चौथ पर रख दें। अगले करवा पर इसे प्रवाहित कर दें।
  • यदि पति या पत्नी का ध्यान कहीं और आकर्शित हो गया हो तो आप जमुनिया नगपरपल एमीथीस्ट’  10 से 15 रत्ती के मध्य चांदी या सोने के लॉकेट में बनवा कर, शुद्धि के बादकरवा चौथ पर धारण कर लें।
  • यदि आप अपने जीवन साथी से किसी अन्य के कारण उपेक्षित हैं तो करवा चौथ  के दिन 5 बेसन के लडडू, आटे के  चीनी में गूंधे  5 पेड़े, 5 केले, 250 ग्राम चने की भीगी दाल, किसीऐसी एक से अधिक गायों को खिलाएं जिनका बछड़ा उनका दूध पीता हो। करवा चौथ पर इस समस्या को दूर करने के लिए अपने ईश्ट से विनय भी करें।
  • यदि पति या पत्नी के विवाहेत्तर संबधों की आशंका हो तो एक पीपल के सूखे पत्ते या भोजपत्र परउसकानाम लिखें किसी थाली में इस पत्र पर तीन टिक्कियां कपूर की रख करजला दें और इस संबंध विच्छेद की प्रार्थना करें।

करवा चौथ की कहानी

इस रोज बगैर खाए या पिए महिलाएं अपने पति या होने वाले पति की लंबी उम्र की कामना में व्रत रहती हैं  करवा चौथ को लेकर कई कहानियां हैंएक कहानी महारानी वीरवती कोलेकर हैसात भाइयों की अकेली बहन थी वीरवतीघर में उसे भाइयों से बहुत प्यार मिलता थाउसने पहली बार करवा चौथ का व्रत अपने मायके यानी पिता के घर रखासुबह से बहनको भूखा देख भाई दुखी हो गएण् उन्होंने पीपल के पेड़ में एक अक्स बनायाए जिससे लगता था कि चंद्रमा उदय हो रहा हैवीरवती ने उसे चंद्रमा समझाण् उसने व्रत तोड़ दिया ण्जसे हीखाने का पहला कौर मुंह में रखाए उसे नौकर से संदेश मिला कि पति की मौत हो गई है  ण्वीरवती रात भर रोती रहीउसके सामने देवी प्रकट हुईं और दुख की वजह पूछीदेवी ने उससेफिर व्रत रखने को कहा  ण्वरवती ने व्रत रखा  उसकी तपस्या से खुश होकर यमराज ने उसके पति को जीवित कर दिया। 

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