अधिकतर कृष्ण जन्माष्टमी दो अलग-अलग दिनों पर हो जाती है. जब-जब ऐसा होता है, तब पहले दिन वाली जन्माष्टमी स्मार्त सम्प्रदाय के लोगों के लिए और दूसरेदिन वाली जन्माष्टमी वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए होती है. जो कि इस वर्ष भी 2 दिन पड़ रही है. जिसमे प्रथम दिन अर्थात 2 सितम्बर को स्मार्त की होगी और 3सितम्बर को वैष्णव संप्रदाय की मनाई जाएगी. पुराणों के अनुसार  भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रकृष्ण अष्टमी तिथि बुधवार , रोहिणी नक्षत्र व बृष राशि में अभिजीत मुहूर्त के अधीन हुआ है। ज्योतिषीय योगों के अनुसार यह एक दुर्लभ संयोग होता है, इसीलिए भगवान कृष्ण पूरे संसार...
राखी  श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन ही आती है। 25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी जो 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25मिनट तक रहेगी। इस बार रक्षाबंधन पर  कुंभ राशि  एवं  धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा और पंचक प्रारम्भ हो जाएगा लेकिन...
सती ने भगवान राम की परीक्षा ले ली। राम ने पहचान लिया कि आप तो सती हैं। भगवती हैं। सती अपने किए पर बहुत पछतायीं। तब उनको लगा कि शंकर जी ने उनको क्यों मना किया था कि राम...
नई दिल्ली : अधिकतर लोग अपने घर में सजावटी पौधे लगाते हैं। घर में साज सज्जा का ध्यान रखना तो जरूरी है लेकिन वास्तुशास्त्र के अनुसार कुछ पौधे ऐसे होते हैं जो वास्तु के अनुसार आपको लाभ देते हैं। ऐसा...
मेरठ : ग्रहण के समय नकारात्मक शक्तियां हावी रहती हैं। इसलिए ग्रहण के समय कई सावधानियां बरतनी चाहिए। कहा जाता है कि ग्रहण के समय किसी भी सुनसान जगह या श्मशान न जाएं। घर में बने पूजास्थल को भी...
मेरठ : विवाह रेखा व्‍यक्‍ति के वैवाहिक जीवन के बारे में बताती है। विवाह रेखा की बनावट, प्रकार, उसका आगे बढ़ना, सभी वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है। विवाह रेखा सबसे छोटी उंगली के नीचे होती है। हाथ में विवाह...
मेरठ : जिन लोगों के अंगूठे का पहला पोर लम्बा होता है। वे लोग आत्‍मविश्‍वास से भरे होते हैं। वे अपना मार्गदर्शन खुद करने के साथ ही काफी जागरुक रहते हैं। हालांकि हथेली से जुड़ा यह पोर कुछ ज्‍यादा...
नई दिल्ली : बकरीद इस बार यह 22 या 23 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन बकरे की कुर्बानी देने की परंपरा है। इस्‍लाम को मानने वाले लोगों के लिए बकरीद का विशेष महत्‍व है। इस्‍लामिक मान्‍यता के अनुसार हजरत इब्राहिम अपने...
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़, 98156 19620 प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां पड़ती हैं। अधिक मास अर्थात मलमास की अवधि में इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता हैै। परंतु...