राजपुरा: एस.ओ.एस. बाल ग्रामों ने आज अपने संस्थापक डॉ. हर्मन गमायनर का जन्म दिन मनाया। 23 जून एस.ओ.एस. बाल ग्राम में विशेष दिन के रूप में याद किया जाता है क्योंकि यह संस्थापक डॉ. हर्मन गमायनर का जन्म दिन है और 135 देशों और क्षेत्रों में कार्यरत सभी बाल ग्रामों में हर्षोल्लास से ‘एस.ओ.एस. दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। एस.ओ.एस. बाल ग्राम के संस्थापक की उपलब्धियां अकल्पनीय रही हैं। यह आयोजन इस महान द्रष्टा की सफलता का जश्न है और यह मंथन करने का सुअवसर है कि संगठन कैसे अपने मोटो ‘ए लविंग होम फॉर एवरी चाइल्ड’ के साथ निरंतर कार्यरत रहे।

हर्मन गमायनर आस्टेंलिया के मानवतावादी थे, जिन्होंने ‘परिवार यानी खून का रिश्ता’ जैसे युगों पुराने कांसेप्ट को सुधारा और माता-पिता की देखभाल से वंचित बच्चों, बेघर बच्चों के लिए परिवार के साथ मां का प्यार सुनिश्चित किया। पिछले लगभग सात दशकों से एस.ओ.एस. पूरी दुनिया के ऐसे बच्चों की सहायता में लगा है जो मां-बाप की देखभाल से वंचित, बेघर भटकने को लाचार थे।

डॉ. गमायनर का दृढ़ विश्वास था कि देखभाल और सुरक्षा के जरूरतमंद बच्चों को प्यार से पालना, उनके लिए मां का प्यार, परिवार और समुदाय की सहायता और समर्थन सुनिश्चित करना अनिवार्य है। एस.ओ.एस. बाल ग्राम का मिशन बिन मां-बाप के बच्चों और बेघर बच्चों के लिए प्यार, सम्मान, सुरक्षा और आत्म-सम्मान के साथ घर के माहौल में लालन-पालन सुनिश्चित करना है जहां ‘मां’ उनकी देखभाल करे और भाई-बहन का प्यार भरा परिवेश मिले, ताकि उन्हें आजवीन भावनात्मक सुरक्षा का अहसास रहे।

इस अवसर पर श्री सुमंत कर, डेप्युटी नेशनल डायरेक्टर इंटीग्रेटेड चाइल्ड केयर, एस.ओ.एस. भारत बाल ग्राम ने कहा, ‘‘डॉ. गमायनर ने पूरी दुनिया के बेघर और बिन मां-बाप के बच्चों के लिए परिवार बनाने का अनोखा कांसेप्ट दिया और आज पूरी दुनिया के 130 से अधिक देशों के बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है।’’

‘‘एसओएस इंडिया दुनिया का सबसे बड़ा प्रोग्राम है, जिसका लाभ भारत के 22 राज्यों के लगभग 71000 बच्चों को मिला है। बच्चों के लिए दो प्रोग्राम हैं – फैमली बेस्ड केयर और फैमली स्टेंंदनिंग प्रोग्राम,’’ उन्होंने बताया।

एस.ओ.एस. इंडिया के हाल के कैम्पेन #NoChildAlone ने भारत के ऐसे 2 करोड़ बच्चों की दयनीय स्थिति को सामने रखा है जो मां-बाप की देखभाल से वंचित हैं। कैम्पेन लोगों को उत्साहित कर यह सुनिश्चित करने में सफल रहा है कि एस.ओ.एस. इंडिया की देखभाल में ऐसे 26,000 से अधिक बच्चे अब अकेले नहीं रहेंगे।

भारत में जहां देखभाल और सुरक्षा के जरूरतमंद लगभग 2 करोड़ बच्चे हैं एस.ओ.एस. भारत बाल ग्राम जैसे ग्रुप फोस्टर केयर मॉडल पीड़ित बच्चों की जिन्दगी बदल सकते हैं।

भारत का पहला एस.ओ.एस. बाल ग्राम 1964 में ग्रीनफील्ड्स 1⁄4फरीदाबाद1⁄2 में खुला। एस.ओ.एस. भारत बालग्राम सबसे बड़ा और गिनती के कुछ एन.जी.ओ. में एक है जो न केवल धन जुटाता है बल्कि अपने सभी प्रोग्रामों का संचालन और प्रबंधन करते हुए पारदर्शिता और सुशासन भी सुनिश्चित करता है।

पूरे भारत के 32 एस.ओ.एस. ग्रामों में एस.ओ.एस. संस्थापक दिवस समारोह का आरंभ आमंत्रित अतिथियों के पारंपरिक स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ. गमायनर को माल्यार्पन और पुष्पांजलि देने के बाद डॉ. गमायनर के दर्शन और पूरी दुनिया के बेघर बच्चों को प्यार एवं देखभाल के लिए उनके जूनून के बारे में उपस्थित लोगों को संबोधित किया गया। इस अवसर पर एस.ओ.एस. बाल ग्राम से पल-बढ कर वयस्क हो गए युवाओं और संगठन की सेवारत मांओं ने अपने अनुभव बता कर श्रोताओं में सेवाभाव का संचार किया।

इस अवसर पर एक पुस्तक ‘द टैंकिंग फुटप्रिंट्स बुक ऑफ सेटल्ड यूथ’ का लोकार्पण भी किया गया। इसके लिए एक अध्ययन एस.ओ.एस. भारत बाल ग्राम की ओर से एक अन्य संस्था ने किया। ऐसे कुल 269 सुव्यवस्थित युवकों का यह अध्ययन सैम्पलिंग पद्धति से किया गया। अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आया है कि एस.ओ.एस. के ये सभी बच्चे आज समाज की मुख्य धारा से जुड़ गए हैं। विशेष आयोजन का समापन पुरस्कार वितरण के साथ हुआ। विभिन्न क्षेत्रों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि का उत्साहवर्द्धक संबोधन हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here