सती ने भगवान राम की परीक्षा ले ली। राम ने पहचान लिया कि आप तो सती हैं। भगवती हैं। सती अपने किए पर बहुत पछतायीं। तब उनको लगा कि शंकर जी ने उनको क्यों मना किया था कि राम की परीक्षा मत लो। कई बार जाने-अनजाने हम इस प्रकार की गल्तियां करते ही रहते हैं। हमको भान नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं।

भगवान राम की परीक्षा लेकर सती जब शंकर जी के पास पहुंची तो और भी आश्चर्य हुआ। शंकरजी ने सवाल दागा- ले ली राम की परीक्षा। क्या रहा। सती से तो कुछ जवाब देते नहीं बना। इधर शंकर जी ने मन ही मन विचार किया कि सती ने उनके इष्ट राम की परीक्षा लेकर अच्छा कार्य नहीं किया। मन में विचार आते ही देवतागण जयजयकार करने लगे। भोले, बाबा , यह प्रण तो आप ही ले सकते हो। कालांतर में सती प्रसंग होता है, जिसमें सती शंकर जी के लाख मना करने पर भी अपने पिता राजा दक्ष प्रजापति के यहां जाती हैं। वहां शंकर जी का तिरस्कार होने पर भस्म हो जाती हैं।

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